rimjhim fuhaaro ki saugat laaya hai........
sondhi sondhi khushboo mitti ki
meethi meethi yaade sakhiyo ki,
vo saath me baith ke batiyaana,
garmagaram pakode banana-khilana..
sab kuch saath samet laaya hai..
fir se baarish ka mausam aaya hai....
१०.०७ को सुबह अख़बार उठाया,तो मुखपृष्ठ पे जो ख़बर पढ़ी,दंग रह गई ...ख़बर थी की एक सवा दो वर्ष का मासूम स्कूल में पूल में डूब कर मर गया ........बेहद र्हिदय विदारक घटना थी ये ...पूरे शहर के लोगो की सहानुभूति उस बच्चे के माता-पिता के साथ है ,जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़े को खो दिया ...किंतु ये सवाल सभी के मन में कौंध रहा है की उस मासूम की क्या उम्र थी अभी स्कूल जाने की?आख़िर क्यो माता-पिता उस भेढ़ चाल में शामिल हो जाते है जो आज के युवा अभिभावकों ने बना ली है .क्या बच्चे घर में रह कर वो सब नही सीख सकते,जो इन तथा कथित प्रीनार्सरीस्कूलों में पढाया जाता है?आखिर क्यो इतनी छोटी सी उम्र में बच्चो को अनुशासन में रहने को मजबूर किया जाता है?वो भी अपने ही माता-पिता के द्वारा?मेरा आशय उस बच्चे के माता-पिता को चोट पहुचाना